मंगलवार, 5 जनवरी 2010

नव वर्ष मंगलमय हो


नई किरण हो नया सबेरा।
नई उमंगे नया उजेरा
जीवन का हर दिन हो शुभदिन।
घर में हो खुशियों का डेरा।

बस इसी कामना के साथ सभी ब्लॉग दर्शकों को मेरी और से नव वर्ष की हार्दिक बधा

आपको अपनी एक और रचना से रूबरू कराती हूँ जो हाल ही में मन बैचैन होने पर लिखी।

किसकी खोज जो मिलता नहीं।
कौन है जो दिखता नहीं।
हर पल हर घडी जिसका इंतजार।
दुआओं में है वो हर बार।
कोई गैर नहीं वो तो है मेरा चैन
जिसे अक्सर हर कोई चाहता है।
वो तो है सुकून................

9 टिप्‍पणियां:

  1. Wah Niharika ji..Wah....kia yaad dilaya aapne...

    Sukun .....Sab kuch hai. per yahi gayeab hai zindgi se.... Pahle tha .. Ab jane kaha chala gaya hai....

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  2. wah niharika ji kya baat hai... hum bhi hai us shukh chain ki talash mein or sukun ki talash mein apgar kahi apko mil jaye to hame batayiyega.....

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  3. shukriya tarif ka..:)
    aur sukun ki talaash mein hi sab hai !

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  4. hi I gaurav is this side.. i like your blog good keep it up...
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  5. jee bas ek adad sukoon ki hi chah hai sabki bas tareeke alag hain... likhti rahiye.. :)

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  6. कविता है, या क्‍या है. कुछ समझ में नहीं आया. स्‍पष्‍ट करें.

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