
नई किरण हो नया सबेरा।
नई उमंगे नया उजेरा।
जीवन का हर दिन हो शुभदिन।
घर में हो खुशियों का डेरा।
बस इसी कामना के साथ सभी ब्लॉग दर्शकों को मेरी और से नव वर्ष की हार्दिक बधाई।
आपको अपनी एक और रचना से रूबरू कराती हूँ जो हाल ही में मन बैचैन होने पर लिखी।
किसकी खोज जो मिलता नहीं।
कौन है जो दिखता नहीं।
हर पल हर घडी जिसका इंतजार।
दुआओं में है वो हर बार।
कोई गैर नहीं वो तो है मेरा चैन।
जिसे अक्सर हर कोई चाहता है।
वो तो है सुकून................
Wah Niharika ji..Wah....kia yaad dilaya aapne...
जवाब देंहटाएंSukun .....Sab kuch hai. per yahi gayeab hai zindgi se.... Pahle tha .. Ab jane kaha chala gaya hai....
Achhaa likha hai ...... nav varsh ki shubhkaamnaayen .....
जवाब देंहटाएंwah niharika ji kya baat hai... hum bhi hai us shukh chain ki talash mein or sukun ki talash mein apgar kahi apko mil jaye to hame batayiyega.....
जवाब देंहटाएंrachana achchhi hai........bahut khub likhati hai aap.
जवाब देंहटाएंshukriya tarif ka..:)
जवाब देंहटाएंaur sukun ki talaash mein hi sab hai !
hi I gaurav is this side.. i like your blog good keep it up...
जवाब देंहटाएंWhere Information Lives, Where A Good Time Lives, visit my blog http://helpforlove.blogspot.com
sukoon to khud ke bheetar hee milega. Maha shivratri kee badhayee!!
जवाब देंहटाएंjee bas ek adad sukoon ki hi chah hai sabki bas tareeke alag hain... likhti rahiye.. :)
जवाब देंहटाएंकविता है, या क्या है. कुछ समझ में नहीं आया. स्पष्ट करें.
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