शुक्रवार, 14 नवंबर 2008

हमारा समाज

हमारे समाज के बदलते स्वरूप को हम सभी महसूस कर रहे है। हर रिश्ते के मायने बदल चुके है। आज एक माँ के पास अपने बच्चे को देने के लिए समय नहीं है। क्योंकि वह तेज रफ़्तार से दौड़ती दुनिया के साथ तेजी से दौड़ना चाहती है। ये दौड़ किस चीज के लिए है झूठे अभिमान के लिए या सिर्फ झूटी शान के लिए। क्या हम इस दौड़ मै अपने संस्कार, रीतिरिवाज या परिवेश को नहीं बदल रहे है। हम कुछ पाने कि होड़ मै बहुत कुछ खो तथा छीन रहे है। जिसमे सबसे बड़ी हमारे देश कि वह संस्कृति है जिसके लिए हम दुनिया भर मै जाने जाते है। दूसरे देशों के लोंग हमारी संस्कृति से प्रभावित होकर उसे अपना रहे है और हम उसको भूलते जा रहे है। विदेशीं भारत मै आकर हमारे रीतिरिवाजों से शादी करते है जब कि हमने हमारे यहाँ होने वाले संस्कारो मै भी कटौती कर दी है। इसके पीछे एक मुख्य कारण तो लोंगो के पास समय का न होना ही है । दूसरी तरफ माँ बाप अपने बच्चों से उनका बचपन भी छीन रहे है । माँ बाप के पास इतना भी समय नहीं है कि वह कम से कम शिशु अवस्था तक अपने बच्चे को भरपूर समय दे सके और नाही परिवार मै कोई और ऐसा होता है जो उस कमी को पूरा कर सके और बच्चें समय से पहले बड़े हो जाते है । पुराने समय मै व्यक्ति के पास इतना धन होना पर्याप्त था कि वह आराम से अपने परिवार का भरण पोषण कर सके । हर व्यक्ति पैसे कमाने की अंधी दौड़ मै नहीं दौड़ना चाहता था । परन्तु आज व्यक्ति पैसे कमाने की होड़ मै इंसानियत का गुण भी भूलता जा रहा है । हमारे धर्म ग्रंथो मै माता पिता को ईश्वर स्वरुप मानकर पूज्यनीय बताया गया है । परन्तु आज बच्चो के लिए उनका सम्मान करना तो दूर की बात है घर मै भी रखने को तैयार नहीं होते । ये हमारे समाज के लिए अत्यंत विचार का विषय है कि हम किस संस्कृति कि ओर अग्रसर है ओर भविष्य मै इसका परिणाम क्या होगा । शायद भविष्य मै हमारी संस्कृति को जानने वाला भी कोई नहीं होगा ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. निहारिका,
    ब्लोगिंग की दुनिया में स्वागत है...
    हालाँकि तुम्हारे अनुसार तुम्हे जीवन अनुभव है.. फ़िर भी लिखती रहो... और अनुभव आता रहेगा....
    बधाई

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  2. are niharika tum to bahut achha likhti ho. ye main dil se nahee kah rahaa hoon. tum aur sara likho aur kisi din mere blog par ghoomne zaroor aana. tum mujhe ache lage isliye tumhe invitation de rahaa hoon. ok
    my blog is www.mastanasafar.blogspot.com

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  3. zindagi to ek nadi ki tarah hai...satat chalti rahti hai....do kadam aur chale jeevan ka anubhav hote jaega....achha likha hai...likhte rahiye....

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  4. निहारिका,
    apna email id freelancetextiledesigner@gmail.com par bhej dae taki aap sae baat karna sambhav ho paye

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