रविवार, 7 मार्च 2010

अब और कब तलक


बाल विवाह जैसी कुप्रथा आज भी हमारे समाज में अपने पैर पसारे हुए है। इसका अंदाजा हम हाल ही में नेशनल फैमिली हेल्थ द्वारा किए गए सर्वे से लगा सकते हैं। इसकी रिपोर्ट के अनुसार तमाम प्रचार और अभियानों के बावजूद भारत में आज भी बढ़ी संख्या में बाल विवाह हो रहे हैं। इससे साबित होता है कि आज भी लोग कन्यादान के लिए बाल विवाह को ही सही मानते हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े-
यूनिसेफ द्वारा बाल विवाह की रोकथाम के लिए कलकत्ता में चल रहे सेमिनार (माय चाइल्डहुड, माय राइट््स) में जारी फैमिली हेल्थ सर्वे 2009 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 47.4 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में हो जाती है। यह भी सामने आया है कि बाल विवाह के मामले में बिहार पिछले दस साल में सबसे आगे वाले पायदान पर है। यहां लगभग 69 प्रतिशत शादी 18 वर्ष से कम उम्र में ही कर दी जाती हैं। राजस्थान राज्य बाल विवाह के मामले दूसरे स्थान पर है। यहां लगभग 65 प्रतिशत बाल विवाह के मामले सामने आए हैं। झारखंड इस मामले में तीसरे स्थान पर है यहां करीब 63 प्रतिशत मामले बाल विवाह के होते हैं। मध्य प्रदेश मेें 59 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 60 प्रतिशत विवाह कच्ची उम्र में कर दिए जाते हैं।
दस साल पहले क्या थी स्थिति-
यूनिसेफ के आंकड़ों ने इस बात की पुष्टि की है कि बाल विवाह आज भी बीते दिनों की बात नहीं है। दस साल पहले से आज तक बाल विवाह में कोई खास परिवर्तन देखनेे को नहीं मिला है। 1999 की रिपोर्ट बताती है कि बाल विवाह के मामले में 71 प्रतिशत के साथ बिहार तब भी अव्वल था। राजस्थान 68.3 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर और 64.7 प्रतिशत के साथ मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर था। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 64.3 प्रतिशत पर था। मध्य प्रदेश में अब जहां बाल विवाह की स्थिति में सुधार हुआ है वहीं पश्चिम बंगाल में बाल विवाह के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है। पश्चिम बंगाल में दस साल पहले बाल विवाह का प्रतिशत 45.9 था, अब यह आंकड़ा बढ़कर 55 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
क्या वजह है बाल विवाह की-
रिपोर्ट के अनुसार अशिक्षा, रूढि़वादी परम्पराएं कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। पहले सार्थक विरोध न होने के कारण बाल विवाह खुलेआम होते थे। बाल विवाह तो आज भी हो रहे हैं लेकिन चोरी छिपे। आज भी बिहार, राजस्थान जैसे प्रांतों में अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी जैसे बड़े मुहूर्तों पर बाल विवाह होते हैं।
क्या है बाल-विवाह अधिनियम- बाल विवाह निरोधक अधिनियम 1929 के अनुसार 21 साल से कम उम्र के लड़के व 18 साल से कम उम्र की लड़की का विवाह करना कानूनन जुर्र्म है। इस कानून के मुताबिक अगर इस आयु सीमा से कम उम्र के लड़के व लड़की शादी करते हैं तो उन्हें 15 दिन की जेल व 100 रुपए जुर्माना या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती हैं। इसके अलावा धारा 4 के अनुसार मां-बाप या रिश्तेदार के दोषी पाए जाने पर 3 माह की जेल व जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती हैं।
बाल विवाह की कैसे कर सकते हैं शिकायत-
कोई भी जागरूक नागरिक बाल विवाह की शिकायत पुलिस थाने में कर सकता है। इसके बाद पुलिस आरोपियों पर मुकदमा चलाती है। दोषी पाए जाने पर अपराधियों को तीन माह की जेल व 1000 रुपए का जुर्माना हो सकता है।

5 टिप्‍पणियां:

  1. Jai Ho Mangalmay HO...aapke is article ko dekhkar lagta hai...ki aap journalist banane ki rah par bahut tezi se bad rahe ho...


    wahhh likhte raho swagat hai!

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  2. "जानकारीपरक था आपका यह लेख निहारिका, पर इसका हल क्या है कानून के बल पर कुछ नहीं होने वाला ........"
    प्रणव
    amitraghat.blogspot.com

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  3. you are right.But the issue is that we are not taking a single steps to prevent all this. Think on a point ,:"those womenes were discuaaing the Balika Vadhu there ,Are not qe doing the same thinkg on internet???"

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  4. aap ne is mudde par likha hai yahi bahut mahatwapoorn hai niharika.

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