रविवार, 1 फ़रवरी 2009

यहाँ तो चलेगी हमारी मर्जी

आज आपको जीवन के एक और अनुभव से परिचित कराती हूॅँ। जिसमें सरकारी दफ्तर के कर्मचारीयेां की कामचोरी साफ नजर आती है। जाने कितने सरकारी दफ्तर है। जहाँ पर काम करने की समय सीमा कर्मचारियों की मर्जी पर ही निर्भर करती है। काम के लिए निर्धारित समय सीमा कर्मचारियों के लिए कोई मायने नहीं रखती।
बात कुछ दिन पहले कि है। घर पर कोई न होने के कारण बिजली का बिल जमा करने की जिम्मेदार मेरे सर थी। वही शिवरात्रि की छुट्टी पर अपने घर भिण्ड जाने का मन भी था। सो शनिवार को बिल जमा करने का मन बना लिया। अब मैने सबसे पहले बिल देखा जिस पर बिल जमा करने के लिए सुबह नौ बजे से शांम 4 बजे का समय दिया था। इसलिए जल्दी जल्दी सारे काम खत्म कर 2 बजे के करीब पास ही के सर्विस क्रमांक पर पहुँची। वहाँ पहुँची तो देखा कि बिल जमा करने वाली खिडकी बन्द हो चुकी अब मैने दोबारा बिल पर दिए समय को देखना उचित समझा कहीं मैने देखने मैने कोई गलती तो नहीं कर दी पर मै सही थी। अब मै दफ्तर के अन्दर गई वहाँ मैने ऊगता हुआ आदमी बैठे हुए देखा और मैने उससे बिल जमा करने के लिए बोला तो बो उबासी लेते हुए बोला यहाँ बिल केबल दो बजे तक ही जमा होते है मैने बोला लेकिन बिल पर तो 4 बजे तक का समय लिखा हुआ है। तो वह गुस्से मै बोला पर यहाँ 2 बजे तक ही होते है। ज्यादा पूछने पर बोला आपको बिला जमा करना है या नहीे साथ ही ये भी बता दिया कि अब दो दिन छुट्टी है इसलिए यहाँ जमा नहीं होगा आपको दूसरे सर्विस क्रमांक पर जाना होगा। अब बिल तो जमा करना ही था सो आज ही दूसरे सर्विस क्रमांक पर जाने का निर्णय ले लिया वो थोडी दूर जरूर था पर जाना तो था ही। अब देखते है कि यहाँ भी खिड़की बन्द हो चुकी है। चलो यहाँ एक गनीमत थी कि बिल जमा करने की समय अवधि लिखी हुई थी लेकिन बिल के अनुसार वो भी गलत थी सोमवार से शनिवार सुबह 9 बजे से 3 बजे तक और अवकाश वाले दिन 9 बजे से 1 बजे तक मैने अपनी घड़ी मे देखा मै 5 मिनट लेट थी। अब बिल जमा हो जाए इस लालच मैं अन्दर जाकर पूछना उचित समझा । इतने मै एक अंकलजी ने खिड़की से झाककर पूछा क्या है। मैने बोला बिल जमा करना था। तब उनका उत्तर था यहाँ बिल एक बजे तक जमा होते है। मैने कहा यहां तो 3 बजे का समय दिया है। हम तो एक बजे तक ही जमा करते है। शायद उन्होने धड़ी मै समय नहीं देखा था वर्ना उन्हे बहस करने की जरूरत नहीं पड़ती बहुत विनयपूर्वक कहने पर भी वे जमा करने को तैयार नहीं हुए। मेरे ये कहने पर की इस बिल पर तो 4 बजे तक का समय दिया हुआ है। तब उनका उत्तर था। कि बिल तो जबलपुर से छपकर आते है उससे यहां का कोई लेन देना नहीं है। मैने पूछा कि अब इस बिल के कारण उपभोक्ता को होने वाली परेसानी के लिए कौन जिम्मेदार है। तब उन्होने कहा कि उपभेाक्ता को पता कर लेना चाहिए कि बिल कब तक जमा किए जाते है। इतनी सारी जानकारी लेने के बाद आखिर निरास होकर घर लौटना पड़ा।
अब आप ही बताइये कि बिना समय सारणी के भी कोई दूसरा तरीका है। जिससे कर्मचारियों का कब तक काम करने का मन है। ये जाना जा सकें।

13 टिप्‍पणियां:

  1. zanaab achha likha hai
    par Is laalachi sansaar ke dar se apna kartavya kabhi nahi bhoolana chahiye.

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  2. राहुल जी के ब्लॉग के ज़रिए आपके ब्लॉग तक पहुंचा। विषय साधारण और जुगाड़वाद का उठाया आपने, थोड़ा सा जुगाड़ लगाया होता तो बिल शायद जमा हो गया होता। अपनी नौकरशाही संत मलूकदास की भक्त है। उन्हें पता है कि अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।

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  3. 1 oongta huaa aadmi mila.....

    bahut achchha chitran kiya hai...

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  4. बिजरी बोर्ड ही ऐसा बोर्ड है जो ऐसा बिल देता है... जिस पर लिखा होता है.. भूल- चूक लेनी देनी..
    पर ये सिर्फ लेना ही जानते है.. गरीब जनता को इतना परेशां करते है... की बेचारी जनता का हाल सिर्फ वो ही बता सकती है...
    अनुभव को सब्दों में खूबसूरती के साथ पिरोया है..

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  5. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  6. आज आपको जीवन के एक और अनुभव से परिचित कराती हूॅँ। जिसमें सरकारी दफ्तर के कर्मचारीयेां की कामचोरी साफ नजर आती है। जाने कितने सरकारी दफ्तर है। जहाँ पर काम करने की समय सीमा कर्मचारियों की मर्जी पर ही निर्भर करती है। काम के लिए निर्धारित समय सीमा कर्मचारियों के लिए कोई मायने नहीं रखती।
    बात कुछ दिन पहले कि है। घर पर कोई न होने के कारण बिजली का बिल जमा करने की जिम्मेदार मेरे सर थी। वही शिवरात्रि की छुट्टी पर अपने घर भिण्ड जाने का मन भी था। सो शनिवार को बिल जमा करने का मन बना लिया। अब मैने सबसे पहले बिल देखा जिस पर बिल जमा करने के लिए सुबह नौ बजे से शांम 4 बजे का समय दिया था। इसलिए जल्दी जल्दी सारे काम खत्म कर 2 बजे के करीब पास ही के सर्विस क्रमांक पर पहुँची। वहाँ पहुँची तो देखा कि बिल जमा करने वाली खिडकी बन्द हो चुकी अब मैने दोबारा बिल पर दिए समय को देखना उचित समझा कहीं मैने देखने मैने कोई गलती तो नहीं कर दी पर मै सही थी। अब मै दफ्तर के अन्दर गई वहाँ मैने ऊगता हुआ आदमी बैठे हुए देखा और मैने उससे बिल जमा करने के लिए बोला तो बो उबासी लेते हुए बोला यहाँ बिल केबल दो बजे तक ही जमा होते है मैने बोला लेकिन बिल पर तो 4 बजे तक का समय लिखा हुआ है। तो वह गुस्से मै बोला पर यहाँ 2 बजे तक ही होते है। ज्यादा पूछने पर बोला आपको बिला जमा करना है या नहीे साथ ही ये भी बता दिया कि अब दो दिन छुट्टी है इसलिए यहाँ जमा नहीं होगा आपको दूसरे सर्विस क्रमांक पर जाना होगा। अब बिल तो जमा करना ही था सो आज ही दूसरे सर्विस क्रमांक पर जाने का निर्णय ले लिया वो थोडी दूर जरूर था पर जाना तो था ही। अब देखते है कि यहाँ भी खिड़की बन्द हो चुकी है। चलो यहाँ एक गनीमत थी कि बिल जमा करने की समय अवधि लिखी हुई थी लेकिन बिल के अनुसार वो भी गलत थी सोमवार से शनिवार सुबह 9 बजे से 3 बजे तक और अवकाश वाले दिन 9 बजे से 1 बजे तक मैने अपनी घड़ी मे देखा मै 5 मिनट लेट थी। अब बिल जमा हो जाए इस लालच मैं अन्दर जाकर पूछना उचित समझा । इतने मै एक अंकलजी ने खिड़की से झाककर पूछा क्या है। मैने बोला बिल जमा करना था। तब उनका उत्तर था यहाँ बिल एक बजे तक जमा होते है। मैने कहा यहां तो 3 बजे का समय दिया है। हम तो एक बजे तक ही जमा करते है। शायद उन्होने धड़ी मै समय नहीं देखा था वर्ना उन्हे बहस करने की जरूरत नहीं पड़ती बहुत विनयपूर्वक कहने पर भी वे जमा करने को तैयार नहीं हुए। मेरे ये कहने पर की इस बिल पर तो 4 बजे तक का समय दिया हुआ है। तब उनका उत्तर था। कि बिल तो जबलपुर से छपकर आते है उससे यहां का कोई लेन देना नहीं है। मैने पूछा कि अब इस बिल के कारण उपभोक्ता को होने वाली परेसानी के लिए कौन जिम्मेदार है। तब उन्होने कहा कि उपभेाक्ता को पता कर लेना चाहिए कि बिल कब तक जमा किए जाते है। इतनी सारी जानकारी लेने के बाद आखिर निरास होकर घर लौटना पड़ा।
    अब आप ही बताइये कि बिना समय सारणी के भी कोई दूसरा तरीका है। जिससे कर्मचारियों का कब तक काम करने का मन है। ये जाना जा सकें।

    KRIPYA ISE ANYATHA NA LE. KYA AAPKA BLOG VAAKAI SURAKSHIT HAI?
    YE LOCK ISIILIYE BANAA KAR LAGAAYA JA RAHAA HAI KI POST KO COPY NA KIYA JA SAKE. YAHAN AAPKI POORI POST HAI............???????

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  7. bahut khub likha hai. kai din se aapka blog check kar raha tha kai din bad aapne posting ki hai. mere blog par aayen

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  8. Bill jama karne wale babu kya kare? din bhar ka cash lagbhag 2-3 lakh rupees ho jaata hai. itne chiller chash ko rakhne ki aur security ki koi vyavastha bijli office me nahi hoti. isliye rakam ko usi din bank me bijli vibhag ke khate me jama karana padta hai. agar 4 baje tak bil jama karenge to rakam bank kab le jayenge, bank me 2 ghante lag jaata hai. Isliye bil me time jo bhi likha ho babu 1 baje tak hi bil jama karte hai, phir ek ghante tak cash book/ register/bank voucher tayyar karte hai. 2 baje bank pahuch jaye tabhi bank band hone se pahle rakam bijli vibhag ke khate me jama ho sakti hai.
    aap ko line me na lagna pade isliye aap bil ke saath cheque attach kar bijli office me peti me bhi daal sakti hai.lekin abhi ye peti sabhi office me nahi lag saki hai.
    technology aa rahi hai...kuchh hi mahino me aap ghar se hi internet par bijli bill pay kar dengi apne ATM/debit/credit card se.

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  9. This all happens because of non-professional top management in electicity sector....all are IAS running the distribution companies without any past experience in power sector management. No professional training given to clerks such as custemor relation management.

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  10. ... प्रसंशनीय अभिव्यक्ति!!!

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  11. vande matram
    namaskaar
    harekrishn ji dwara aapke blog tak pahuncha

    aapne jo anubhav bataya bahut hi aam ho gaya hai sab ke liye .

    magar ham aapki kadra karte hain ki aapne itne achhe aur bariki se ise likha .

    aap kranti ki agradoot hain kyonki aab aapki kalam aag ugalne lagi hai .

    vande matram

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