रविवार, 2 नवंबर 2008

माँ

माँ शब्द का संसार इतना गहरा है कि उसे समझना मनुष्य कि सोच से परेह है ये शब्द मुंह पर आते ही एक अजीब सी अनुभूति होती है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है शब्दों मै जिसे परिपूर्णता नहीं मिल सकती अच्छे से अच्छे व्याख्याता भी इसे वर्णित नहीं कर सके फिर हम क्या चीज है। माँ चाहे एक मजदूर के बच्चे की माँ हो या फिर एक संपन्न परिवार के बच्चे की माँ तो सिर्फ बच्चे से प्रेम करना जानती है और दुनिया की बुरी नजर से बचाने के लिए उसे डांटना भी, माँ के हाथ की सुखी रोटी छप्पन प्रकार के भोजनों से बड़कर होती है एक बच्चे का सारा सुख चैन और उसके हर दुख दर्द की दवा माँ के पास ही होती है
कल जब मैंने अपनी बालकनी से झांककर देखा तो तीन चार बच्चे कचरा बीनते दिखाई दिए, जिनमे तीन लडके और एक लड़की थी मैले कुचैले फटे कपडे पहने वे सभी मस्ती मै कचरा बीनते भाई बहिन से दिख रहे थे, इतने मैं सिर पर तसला रखे एक औरत आती दिखी और एक मकान के बगल से तसला रख कर बैठ गयी। उन सभी बच्चों को नाम लेकर बुलाया सभी बच्चे माँ को घेर कर बैठ। उन सभी को देखकर ऐसा लग रहा था मानो सालो से नहाया न हो। मैं सही ही थी वे सभी भाई बहिन ही थे। उन्हें देखकर मन मै उनके बारे मैं जानने के बारे में मेरी जिज्ञासा बड़ती ही जा रही थी, मै लगातार उनकी और देखे जा रही थी। सबसे छोटे बेटे को गोद मै उठा दुलार कर उसके माथे को चूमा, उसे देखकर यही लग रहा था मानो वो उसे जीवन की कठिनाइयों के लिए तैयार कर रही हो उस चार पॉँच वर्ष के काली देह वाले लडके के शरीर पर केवल एक ही कपडा था तभी उससे एक दो वर्ष बड़े लडके ने कहा माँ भूख लगी है जल्दी से औरत ने अपने पल्लू मै लगी गांठ को खोला और उसमे से चार रोटिया अचार निकाल सभी को प्यार से खिलाने लगी, शायद उसका पेट बच्चों के पेट भरने से ही भर गया था। खाना खाकर बच्चे अपने खेल में मस्त हो गए उनमे से दो बच्चों मे आपस मै झगडा भी होने लगा। माँ पास मै पड़ी छड़ी उठाकर उन्हें डाटने लगी इतने स्वरुप तो सिर्फ माँ के ही हो सकते हैं इतने मै मेरी माँ ने मुझे आवाज दी और मै अन्दर आ गई मैंने कुछ दिनों तक उसी समय उस औरत को वहां आते देखा शायद वह कहीं दूर से यहाँ मजदूरी करने आई थी।

7 टिप्‍पणियां:

  1. sach hi kaha hain aapne,kyonki "MAA" hi wahi shabd hain. jo pahli baar bachhe ke muh se nikltaa hain.bachha kaisa bhi ho,achcha ya bura.pr maa ke liye wo hrdam uska laadla rahega.sach ise shabdon me baandha hi nhi jaa sakta hain.

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  2. haalanki main blogger pr nyaa hoon.bt mujhe maanviya life se jude sachhe pahlu sadaiv aakrshit krte he.well aap issi tarah likhti rahiye. humari pratikriyaaye aapko hmesha milengi.

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  3. bahut achchha niharika, abhi tak ye pratibha kanha chhupa rakhi thi. vakai bahut achchha likha hai aapne.

    khoob saari shubhkaamnaye

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  4. bahut achchha niharika, abhi tak ye pratibha kanha chhupa rakhi thi. vakai bahut achchha likha hai aapne.

    khoob saari shubhkaamnaye

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  5. MAA
    yun to
    ek akshar ka naam hai
    par
    sach puchiye to
    isi me charon dhaam hain....

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  6. बहुत अच्‍छा लिखा है। कभी मां के साथ साथ बाप के बारे में भी सोचिए। मेरे ब्‍लाग http://opkidunia.blogspot.com पर आपका स्‍वागत है।
    ओपी सक्‍सेना

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  7. Achha hai soche par vivas kar deta hai ki maa jo itni achhi hoti hai aphe bachho ke liye vo apni saari khusiya saare sapne bhool jaahi hai Phir bhi bachhe maa ko kyo bhool zaate hai uska dard kyon nahi samajhte hai?

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